सचिव ने समावेशी बीमा विकास के रोडमैप के रूप में “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन को रेखांकित किया
बीमा क्षेत्र ने वित्त वर्ष 2024-25 में 11.93 लाख करोड़ रुपये के प्रीमियम और 74.44 लाख करोड़ रुपये के एयूएम के साथ मजबूत वृद्धि दर्ज की
खबरीलाल टाइम्स डेस्क : वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस) के सचिव श्री एम. नागराजू ने आज मुंबई में आयोजित आईएफएस-आईआरडीएआई-जीआईएफटी सिटी वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन के तीसरे संस्करण को संबोधित किया। उन्होंने अपने संबोधन की शुरुआत आईएफएस जीआईएफटी सिटी के उत्कृष्ट प्रदर्शन की सराहना करते हुए की। सचिव महोदय ने कहा कि भारत अपने पुनर्बीमा क्षेत्र में परिवर्तनकारी विकास के मुहाने पर खड़ा है और इस सम्मेलन का विषय“आज के भारत को जोड़ना, कल के भारत का बीमा करना – भारत विकास रोडमैप” पूरी तरह से “2047 तक सभी के लिए बीमा” के विजन के अनुरूप है।
श्री नागराजू ने IFSCA-IRDAI GIFT वैश्विक पुनर्बीमा शिखर सम्मेलन को वित्तीय सेवा क्षेत्र के प्रमुख हितधारकों को एक साथ लाने वाला एक महत्वपूर्ण प्लेटफार्म बताया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि बीमा और पुनर्बीमा भारत को अपने आर्थिक लक्ष्यों की ओर अग्रसर करने में अत्यंत महत्वपूर्ण निभाते हैं, विशेषकर ऐसे समय में जब देश वैश्विक अर्थव्यवस्था में अपनी भूमिका को सुदृढ़ कर रहा है। वैश्विक आर्थिक परिदृश्य का जिक्र करते हुए सचिव महोदय ने कहा कि 1.46 अरब से अधिक आबादी वाला भारत विश्व का सबसे बड़ा लोकतंत्र है और चुनौतीपूर्ण वैश्विक परिस्थितियों के बावजूद एक वैश्विक शक्ति के रूप में उभरा है तथा 2026 में 6.6 प्रतिशत अनुमानित वृद्धि के साथ विश्व की सबसे तेजी से बढ़ने वाली प्रमुख अर्थव्यवस्था बना हुआ है।
वैश्विक बीमा परिदृश्य पर स्विस री सिग्मा रिपोर्ट (संख्या 02/2025) का हवाला देते हुए सचिव महोदय ने कहा कि 2024 में मजबूत प्रदर्शन के बाद वैश्विक आर्थिक मंदी और अस्थिर नीतिगत माहौल के कारण वैश्विक बीमा उद्योग क्षेत्र में जीवन और गैर-जीवन दोनों खण्डों में प्रीमियम वृद्धि धीमी हो रही है। स्विस री की रिपोर्ट के अनुसार, भारत 2024 में नाममात्र प्रीमियम मात्रा के आधार पर वैश्विक स्तर पर 10वां सबसे बड़ा बीमा बाजार बना रहा, जिसकी बाजार हिस्सेदारी 1.8 प्रतिशत थी। बीमा पैठ 3.7 प्रतिशत रही, जिसमें जीवन बीमा 2.7 प्रतिशत और गैर-जीवन बीमा 1 प्रतिशत था, जबकि बीमा घनत्व मामूली रूप से बढ़कर 97 अमेरिकी डॉलर हो गया, जो महत्वपूर्ण अप्रयुक्त बाजार क्षमता का संकेत देता है।
सचिव महोदय ने यह भी बताया कि भारतीय बीमा क्षेत्र, जो वित्तीय प्रणाली का एक अभिन्न अंग है, मृत्यु, संपत्ति और दुर्घटना जोखिमों से सुरक्षा प्रदान करके, बचत को प्रोत्साहित करके और अवसंरचना विकास तथा अन्य दीर्घावधि परियोजनाओं के लिए दीर्घकालिक निधि उपलब्ध कराकर अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान इस क्षेत्र ने 41.84 करोड़ पॉलिसियां जारी कीं, 11.93 लाख करोड़ रुपये का प्रीमियम एकत्र किया, 8.36 लाख करोड़ रुपये के दावों का भुगतान किया और 31 मार्च 2025 तक 74.44 लाख करोड़ रुपये की प्रबंधित संपत्ति दर्ज की। भारत में कुल पुनर्बीमा बाजार 2024-25 में 1.12 लाख करोड़ रुपये रहा।
सरकार और बीमा विनियामक ने विकास और बीमा की सुलभता को बढ़ावा देने के लिए नीतिगत ढांचे और संरचनात्मक सुधारों को सक्षम बनाया है। बीमा क्षेत्र में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की सीमा बढ़ाकर 100 प्रतिशत कर दी गई है, पिछले वर्ष एक नए पुनर्बीमाकर्ता का पंजीकरण किया गया और सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानूनों में संशोधन) अधिनियम, 2025 के अंतर्गत पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष के गठन का प्रावधान किया गया है, डेटा संरक्षण को डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण अधिनियम, 2023 के अनुरूप बनाया गया है तथा आईआरडीएआई की विनियामक शक्तियों को सुदृढ़ किया गया है।
अपने संबोधन के समापन में सचिव महोदय ने भारत को वैश्विक पुनर्बीमा केंद्र बनाने की आकांक्षा को आगे बढ़ाने में आईएफएससीए की भूमिका पर प्रकाश डाला। आईएफएससीए अधिनियम, 2019 के तहत जीआईएफटी सिटी आईएफएससी वैश्विक समकक्षों के अनुरूप है; आईएफएससी बीमा कार्यालयों को विनियमित करता है; विदेशी पुनर्बीमाकर्ताओं को शाखाएं स्थापित करने में सक्षम बनाता है; विनियमों को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है तथा आईएफएससी, विशेष आर्थिक क्षेत्रों (एसईजेड), घरेलू शुल्क क्षेत्रों और विदेशी बाजारों में पुनर्बीमा को सुगम बनाता है। उन्होंने कहा कि भारत का बीमा और पुनर्बीमा क्षेत्र आगे बढ़ने की राह पर। भारतीय बीमाकर्ताओं और पुनर्बीमाकर्ताओं को जीआईएफटी सिटी के माध्यम से वैश्विक अवसरों का लाभ उठाने और “2047 तक सभी के लिए बीमा” के लक्ष्य को प्राप्त करने के हेतु सभी हितधारकों के साथ मिलकर काम करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।